क्या दिन थे वो भी


वो भी क्या जमाना था, क्या दिन थे। सब कुछ कितना शांत था। ना इतनी गाड़ियाँ थी ना इतनी मारकाट। समय कितना जल्दी बदल रहा है।
Munirka, New Delhi

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The Ultra Mild

भीड़ भरी सड़क के किनारे हल्की ठंडी शाम में धूएं में क्या घुल रहा होगा। किसी की आँखों का नशा, धूल की महक, ढोल की आवाज़, विदाई गीत। गाँव से और किसी के पास से लौटने के बाद के कुछ दिन कितने उदासी भरे होते हैं।

बंदूकें और बच्चे

शहर भागता है बहुत ही तेज़ समय से एक सूइया आगे। और उस भागते शहर में किसी जगह बच्चे मिल जाएँ तो ऐसे लगता है जैसे गर्मी के दिनों में पसीने से तरबतर किसान को कोई ठंडी हवा का झोंका छू गया हो। 

और जब बच्चों से बात कि तो लगा जैसे तपती लू का कोई थपेड़ा झुलसा गया।

ये बच्चे बड़े होकर फौजी बनना चाहते हैं, दुश्मन को मारना चाहते हैं और इनका दुश्मन है पाकिस्तान। ये सब सिखाया है घरवालों ने।

उफ्फ गोलियाँ, दुश्मन, मारना। हाए रे बचपन।